Thursday, December 23, 2010

क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय

सब तारों की रौशनी अलग, सब चमकते नज़ारे

शायद हम सब का अपना एक तारा हो

उस तारे के लिए हम भी एक नज़ारा हो

वो बूढा फ़रिश्ता देख के हमें हस्ता होगा

जो हिन् अटके, तो हाथ दिया, सामने रस्ता होगा

इस कटपुतली के खेल में हम खिलाडी हैं

एक अनजान रस्ते पे चलते, भटकते राही हैं

रास्ते कटते हैं, मिलते हैं, फिर कट जाते हैं

इस चक्रव्यूह में घूम हम कभी थक जाते हैं

इंतज़ार है, उस वक़्त का, जब मैं शांत बैठ सकूंगा

चाँद के बगल, धागे पकड़ा, एक चमकता सितारा हूँगा.


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